संकटमोचक हनुमान अष्टक: हर आफत का है अचूक तोड़


संकटमोचक हनुमान अष्टक: हर आफत का है अचूक तोड़

धर्मआस्था है कि श्रीहनुमान का नाम लेने से ही संकट कट जाते हैं। दरअसल, श्री हनुमान शिव का अवतार होने से कल्याणकारी शक्तियों के स्वामी भी हैं। यही वजह है कि उनके स्मरण या भक्ति बुरी वृत्तियों, विचारों और कर्म से दूर कर पावन बुद्धि, चेष्टा से जोड़ती है, जिससे जीवन में सुख-शांति भी चली आती है।

 

संकटमोचन की कामना से ही श्रीहनुमान स्मरण के लिए सबसे आसान और असरदार स्तुति है – संकटमोचन हनुमान अष्टक। यह ऐसा पाठ है, जिसमें हनुमान की शक्तियों और गुणों का भाव भरा स्मरण और गुणगान है, जिससे ग्रहदोष शांति भी होती है।

 

संकट के वक्त या आशंका के चलते इस हनुमान अष्टक का यथासंभव श्रीहनुमान की पूजा सिंदूर, लाल फूल और चना-गुड़ का भोग लगाने के बाद पाठ करें और हनुमान आरती करें-

 

अंजनी गर्भ संभूतो, वायु पुत्रो महाबल:।
कुमारो ब्रह्मचारी च हनुमान प्रसिद्धिताम्।।
मंगल-मूरति मारुत नन्दन। सकल अमंगल मूल निकन्दन।।
पवन-तनय-संतन हितकारी। हृदय विराजत अवध बिहारी।।
मातु पिता-गुरु गनपति सारद। शिव समेत शंभु शुक नारद।।
चरन बंदि बिनवों सब काहू। देव राजपद नेह निबाहू।।
बंदै राम-लखन-बैदेही। जे तुलसी के परम सनेही।।
संकट मोचक हनुमान

 

बाल समय रवि भक्ष लियो, तब तिनहुं लोक भयो अंधियारो।

ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहू सो जाता न टारो।

देवन आनी करी विनती तब, छांड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो।।1।।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरी, जात महा प्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महा मुनि शाप दियो, तब चाहिए कौन विचार विचारौ।।

ले द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।2।।

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत न बचिहौं हम सो जुं, बिना सुधि लाए इहां पगु धारो।।

हेरी थके तट सिन्धु सबै तब, लाय सिया सुधि प्रान उबारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।3।।

रावन त्रास दई सिय को तब, राक्षसि सो कही शोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो।।

चाहत सिय अशोक सो आगि सु, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।4।।

बाण लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो।

ले गृह वैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोन सु बीर उबारो।।

लानि संजीवन हाथ दई तब, लछिमन को तुम प्राण उबारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।5।।

रावण जुद्ध अजान कियो तब, नाग की फांस सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।।

आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटी सुत्रास निवारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।6।।

बंधू समेत जबै अहिरावन, ले रघुनाथ पताल सिधारो।

देविहिं पूजि भली विधि सो बलि, देउ सबै मिली मंत्र विचारो।।

जाय सहाच भयो तबहीं, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।7।।

काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहिं जात है टारो।।

बैगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होया हमारो।

को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।8।।

दोहा –

लाल देह लाली लसै, अरु धरि लाल लंगूर।

बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।


3 thoughts on “संकटमोचक हनुमान अष्टक: हर आफत का है अचूक तोड़

  1. jain kuamr

    i am very much inspired by madan ji maharaj i like the way of is teaching with a short time . next time whenever he is comming in the tv channel then he is to say that to tv channel dont come in between the talk. i want daily astrology i am caprocorn

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